- माले की राज्यस्तरीय टीम का नवादा दौरा - सूदखोरों के चंगुल में फंसने के बाद आत्महत्या को विवश हो रहे गरीब.
- जिला प्रशासन द्वारा मामले की लीपापोती का प्रयास, महाजनों पर हत्या का मुकदमा चलाया जाए, सूदखोरी का अंत हो.
- परिवार के शेष बचे सदस्यों को 50 लाख मुआवजा व सुरक्षा की गारंटी दे सरकार.
जांच टीम ने बिहार सरकार से मांग की है कि: 1. आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले सभी सूदखोरों को गिरफ्तार कर उनपर हत्या का मुकदमा चलाया जाए और फास्ट ट्रैक कोर्ट में इसकी सुनवाई की जाए. 2. पीड़ित परिवार को कम से कम 50 लाख मुआवजा दिया जाए व परिवार के बचे सदस्यों की सुरक्षा की गारंटी की जाए. 3. इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए ताकि यह तथ्य खुलकर सामने आ सके कि केदारनाथ गुप्ता के परिवार के साथ सूदखोर आखिर ऐसा कौन सा व्यवहार कर रहे थे कि पूरा परिवार आत्महत्या को मजबूर हुआ. 4. महाजनी सूदखोरी समाप्त की जाए. रजौली प्रखंड के मूलतः अमावां गांव के रहने वाले केदारनाथ अपने परिवार के साथ करीब तीस साल से गढ़पर न्यू एरिया नवादा मुहल्ले में अरूणेश शर्मा के घर में किराये पर रह रहे थे. उन्होंने फल व ढोसा की एक छोटी सी दुकान खोल रखी थी. परिवार में पांच बेटियों तथा दो बेटे में से दो बेटियों व एक बेटे की शादी हो चुकी है. बड़ी बेटी व बड़ा बेटा फिलहाल दिल्ली में रह रहे हंै. दूसरे नंबर की बेटी अपने ससुराल में है.अपनी दूसरी बेटी की ही शादी में उन्होंने मनीष सिंह, विकास सिंह, टुनटुन सिंह खटाल,पंकज सिंहा व रंजीत सिंह से कर्ज ले रखा था, जिसका भुगतान प्रति महीना वे कर रहे थे. 4-5 सालों से लगातार कर्ज की राशि का भुगतान करने के बावजूद ब्याज की दर इतनी थी कि कर्ज का कई गुणा दे देने के बावजूद भी सूदखोर उनपर दबाव बनाए हुए था. मनीष सिंह समेत सभी सूदखोरों द्वारा उनके घर पर चढ़कर गाली-गलौज किया जाता था. उनकी बेटियों पर भी सूदखोरों की नजर रहती थी और उनके साथ अभद्र व्यवहार व बलात्कार करने तक की धमकी दे चुके थे. केदारनाथ अपने परिवार को सुरक्षित नहीं पा रहे थे. उन्हें लग रहा था कि बेटियों की इज्जत बचा पाना मुश्किल है. लिहाजा, उन्होंने अपने परिवार की जिंदगी खत्म करने का निर्णय लिया. केदारनाथ गुप्ता (65) ने पत्नी अनीता देवी (62) और यहां रह रहे अपनी तीन बेटियों व एक बेटे क्रमशः गुङिया कुमारी (20 वर्ष) , शबनम कुमारी (18 वर्ष) , साक्षी कुमारी (16 वर्ष) एवं बेटा ध्रुव उर्फ प्रिंस कुमार उम्र (22 वर्ष) सल्फास की गोली खाकर आत्महत्या कर ली. जहर उन्होंने शहर से दो किलोमीटर दूर मजार के पास जाकर खाया. बाहर रहने वाले ही उनके बच्चे बच सके. यह घटना सूदखोरों के आतंक के कारण ही घटी. पत्नी व दो बेटी की लाश नवादा शहर से करीब दो किलोमीटर दूर मजार शरीफ के पास मिली। बाकी दो बेटी तथा बेटे को किसी तरह से पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल जाने के दौरान ही केदारनाथ गुप्ता ने रास्ते में दम तोङ दिय. दो बेटियां की मौत पावापुरी अस्पताल ले जाने के दौरान बीच रास्ते में हो गई. गढ़पर न्यू एरिया मे मनीष सिंह सरीखे सूदखोरों द्वारा गरीबों पिटाई, सामान उठा ले जाने, छेड़छाड़ की लगातार घटनाएं घटती रही हंै, लेकिन किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं होने से दबंगों व सूदखोरों का मनोबल बढा हुआ है. अभी उस मुहल्ले में भय और आतंक का माहौल बना हुआ है. इस दुखद घटना के खिलाफ 12 नवंबर को व्यवसायिक लोगों ने नवादा में अपनी दुकान बंद रखने का आह्वान किया है. भाकपा-माले ने भी बंद का समर्थन किया है. 13 नवंबर को पूरे जिला में भाकपा माले ने प्रतिवाद दिवस मनाने का फैसला किया है.
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