- भाषाएँ हमारी अस्मिता की प्रतीक : प्रो अंजू श्रीवास्तव
दिल्ली। भारत की सभी भाषाओं का समृद्ध इतिहास है और इनमें हमारी संस्कृति बोलती है। तेलुगु, मलयालम जैसी बड़ी भाषाएँ ही नहीं तुलनात्मक रूप से छोटे समूहों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं में भी भारतीय संस्कृति और इतिहास सुरक्षित है। आज के दौर में इन भाषाओं को जानना तथा इनका सम्मान सबसे महती आवश्यकता है। दिल्ली के प्रसिद्ध हिन्दू कॉलेज की प्राचार्या प्रो अंजू श्रीवास्तव ने कॉलेज में भारतीय भाषाओं को जानो परियोजना के शुभारम्भ पर कहा कि हमारे कॉलेज में भारत की लगभग सभी भाषाओं को बोलने वाले विद्यार्थी, शिक्षक और शिक्षणेत्तर सहयोगी हैं तो इसका लाभ उठाकर सभी भाषाओं को जानने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने इस अवसर पर कॉलेज की साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था संहिता को इस परियोजना का प्रभार दिया। इसके अंतर्गत प्रतिदिन किसी एक शब्द को अधिकाधिक भारतीय भाषाओं में लिखा जाएगा। पहले दिन भारत शब्द को हिन्दी, संस्कृत, उर्दू, मलयालम, बांग्ला, असमी, मणिपुरी, नेपाली, गुरुमुखी, कन्नड़, गुजराती, उड़िया, मराठी सहित लगभग पंद्रह भाषाओं में लिखा गया। इस परियोजना में विद्यार्थी, शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी भी शामिल रहेंगे। आयोजन में हिन्दी की आचार्य डा रचना सिंह ने कहा कि हम सब भारत की विभिन्न भाषाओं के शब्दों का प्रतिदिन प्रयोग करते हैं किन्तु अब हमें यह भी जानना चाहिए कि ये शब्द कहाँ से आए हैं। डा सोमा घोराई, डा वरुणेन्द्र रावत, डा सुनील जोशी, डा नीलम सिंह सहित अन्य शिक्षकों ने भी आयोजन में भाषाओं के महत्त्व पर बताया। संयोजन कर रहे डा पल्लव ने कहा कि भारतीय भाषाओं की इस परियोजना में और भी गतिविधियों का आयोजन निरंतर होगा। अंत में संहिता के परामर्शदाता डा विमलेन्दु तीर्थंकर ने आभार प्रदर्शित किया।
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