इस दीपावली के पावन अवसर पर दीये जलाकर माँ अन्नपूर्णा सेवा समिति,जयनगर के सदस्यों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी है। इस कार्यक्रम में एसएसबी के कमांडेट, दर्जनों जवान एवं उनके सहकर्मी भी मौजूद रहे। सबसे पहले सदस्यों ने शहीदों के नाम का दीया जलाकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सदस्यों ने बारी-बारी से सामने आकर शहीदों के नाम का दीया जलाया। इस मौके पर माँ अन्नपूर्णा सेवा समिति के सदस्यों ने बताया कि इस कार्यक्रम का आयोजन पिछले तीन वर्षों से किया जा रहा है, ये हमारा चौथा वर्ष है। इसके आयोजन का मुख्य उद्देश्य दीपावली के दिन शहीदों को याद करना है। शहीदों की शहादत की बदौलत ही लोग सुरक्षित दीपावली व अन्य पर्व मना पा रहे हैं। सुरक्षा बल दिन रात देश की सुरक्षा में जुटे हैं। इसी प्रयास में कई शहीद हो चुके हैं। इस दिन संदेश दिया जा रहा है कि शहीदों के परिवार खुद को अकेला न समझें। पूरा देश उनके साथ है। इस मौके पर एसएसबी के जवानों के साथ पटाखे छोड़ एवं मिठाई खिला कर उनके साथ खुशियां बांटी और उनके साथ दीपावली मनाई। जिस कारण उन जवानों के चेहरे पर खुशी देखी गयी।
जयनगर/मधुबनी, माँ अन्नपूर्णा सेवा समिति ने दीपावली पर्व के मद्देनजर जयनगर इस्तिथ 48विं वाहिनी एसएसबी के मुख्यालय परिसर बाजार समिति कैंप परिसर में एसएसबी कमांडेंट गोविन्द सिंह भंडारी एवं एसएसबी के जवानों के बीच पहुंचकर उनके साथ दीवाली मनाई। इस दौरान माँ अन्नपूर्णा कम्युनिटी किचन के द्वारा गरीबों को मिठाई भी बांटे गए। इस मौके पर एसएसबी के कमांडेंट गोविन्द सिंह भंडारी ने बताया कि माँ अन्नपूर्णा सेवा समिति के तीनो विंग क्रमशः माँ अन्नपूर्णा कम्युनिटी किचन, माँ अन्नपूर्णा महिला मंच, माँ अन्नपूर्णा रक्त रक्षक, जयनगर अपने-अपने क्षेत्र से जुड़े कार्यों में उम्दा और बेहतरीन कार्य कर रहीं हैं, जो अतुलनीय है। उन्होंने भरोसा दिया कि आगामी भविष्य में एसएसबी का भरोसा भी मिलेगा। आपको बता दें कि ये संस्था पिछले कई वर्षो से जयनगर शहर में जरूरतमंद लोगों के बीच भोजन वितरण कर रही है। साथ ही समय-समय पर कभी मेडिकल कैम्प, हेल्थ चेक अप जांच, सूखा राशन वितरण, ठंड में कंबल, शॉल एवं गर्म कपड़े वितरण, या फिर बाढ़ और सूखाड़ में सुखा राशन वितरण या फिर अन्य कोई सामाजिक कार्य करती रहती है। रक्तदान के क्षेत्र में काम करते हुए 400लोगों की जान अभी तक बचा पायी है। वहीं, इसी संस्थान के द्वारा सैकड़ो लड़कियों एवं महिलाओ को निःशुल्क प्रशिक्षण देकर उनको आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है।
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